नीम और मेथी खाएं, बारिश में नहीं सताएंगे कील-मुंहासे और बाल झरना

नमस्कार दोस्तों Health and Beauty Tips in Hindi की दुनिया मे आपका स्वागत है, मानसूनी बारिश आपको चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाता है परंतु आपके त्वचा और बालों के लिए ढेर सारी मुसीबतों को भी अपने साथ लाता है। हवा में नमी का स्तर ज्यादा बढ़ने साथ ही जीवाणुओं को ज्यादा सक्रिय हो जाने से व्यक्ति को कील-मुंहासे, एलर्जी व बाल झड़ने जैसे समस्या से झूझना पड़ता है। (Benefits of eating neem and methi) त्वचा रोग विशेषज्ञों डॉक्टरों की मानें तो मानसून में कुछ सावधानियां बरतकर चेहरे और बालों की चमक को बरकरार रखा जा सकता है।

Benefits of eating neem and methi. Muhase kaise dur kare.त्वचा की सुंदरता और रौनक बरकरार रखना कोई मुश्किल काम नहीं है।Benefits of eating neem and methi

 

पानी खूब पिएं और आयुर्वेदिक सनस्क्रीम लगाएँ.

मानसून के दिनों में उमस भरा मौसम डिहाइड्रेशन का बड़ा कारण बन सकता है। ऐसे में आप दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी रोज जरूर पिएं। आयुर्वेदिक सनस्क्रीन लगाए अपने चेहरे पर घर से बाहर निकलें से पहले। वरना आपको सन बर्न का शिकायत हो सकता है। हफ्ते-दो हफ्ते में एक या दो बार बेसन, शहद, नींबू के रस और दही से बना फेस पैक ज़रूर लगाए।



दिन में तीन से चार बार अपना चेहरा धोए.

मानसून की हवा में नमी ज्यादा होने से बारिश में आपका त्वचा तैलीय और रोम छिद्रों में गंदगी जम जाने के कारण कील-मुंहासों व एलर्जी की आशंका बना रहता है। ऐसे में आप दिन में तीन से चार बार चेहरा साफ पानी से धोएं साथ ही केमिकल युक्त साबुन और फेशवॉश से जितना हो सके उससे बचे और संभव हो तो आप आयुर्वेदिक उत्पाद का इस्तेमाल करें।

आपको कड़वी चीजें संक्रमण से बचाएगा.

नीम की पत्ती, करेला और मेथी दाने जैसी खाद्य पदार्थ के चीजों में संक्रमण से लड़ने वाले गुण पाए जाते हैं साथ ही एंटीऑक्सीडेंट से लैस हल्दी भी कील-मुँहासे और त्वचा की एलर्जी से लड़ने में काफी फायदेमंद और कारगर साबित होता है। आप जब भी मानसून में चाय पीने की सोचे तो उसमें अदरक, काली मिर्च, तुलसी, शहद, पुदीना डालकर ही चाय पीना काफी फायदेमंद साबित होता है।

Benefits of eating neem and methi
मानसून के मौसम में मसालेदार खाने से थोड़ा परहेज कीजिए.


मानसून (बारिश) के मौसम में तैलीय और मसालेदार खाना खाने से दूर रहने में ही आपका समझदारी है क्योंकि तैलीय खाना जहां त्वचा को ऑयली बनाकर कील-मुंहासों को आमंत्रित करता है, वहीं ज्यादा मसालेदार खाना शरीर का तापमान और रक्तप्रवाह दोनो को बढ़ाकर खुजली, जलन जैसे समस्या को पैदा करते हैं।

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  2. इसके नियमित सेवन के बाद आपको किसी दूसरी दवा की जरूरत नही पड़ेगी,

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Benefits of eating neem and methi. Baal Jharna Kaise roke. मानसून में बाल झड़ने की समस्या यूं दूर रखें.

गुनगुने नारियल तेल से मालिश करें.

मानसून के मौसम में बैक्टीरिया के अधिक सक्रिय हो जाने के कारण सिर की त्वचा में खुजली की शिकायत भी हो सकता है, इससे बचने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार हल्के हाथों से गुनगुने नारियल तेल की मालिश कीजिए और उसके बाद आप शैंपू कीजिए ताकि सिर से मृत त्वचा और बैक्टीरिया हट जाएं। साथ ही जो लोग रूसी की समस्या से परेसान है उनके लिए नारियल की जगह नीम के तेल का उपयोग करना काफी ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

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मानसून के मौसम में दाल, हरी सब्जियां और अंडे का सेवन कीजिए.

प्रोटीन, आयरन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से लैस खाद्य पदार्थ वस्तुएं बाल की जड़ों को काफी मजबूत बनाता हैं ऐसे में दाल, हरी सब्जियों, गाजर, अंकुरित अनाज, राजमा, अंकुरित मूंग, अंकुरित बादाम, अखरोट और डेयरी उत्पादों को भरपूर मात्रा में सेवन कीजिए। फास्टफूड और कैफीन युक्त पेय और खाद्य पदार्थ से दूर रहिए, क्योंकि ये बालों को रूखा, बेजान और पतला कर देता हैं।

मानसून में गीले बालों में कंघी करने से बचिए.

मानसून के समय में हवा में नमी की मात्रा ज्यादा होने की वजह से सिर की त्वचा तैलीय हो जाता है। जिसके कारण बालों की जड़ों को भी नुकसान पहुचता है, ऐसे में अगर आप गीले बालों में कंघी यही कीजिए, बाल झाड़ने के लिए हो सके तो आप मोटे दांत वाले कंघी का उपयोग कीजिए। संभव हो सके तो आप बाल सूखने तक खुले रखिए नही तो आप ढीला चोटी या ढीला जूड़ा भी बांध सकते हैं।Benefits of eating neem and methi

बारिश में भीगने के बाद शैंपू करना जरूरी है.

हवा में मौजूद प्रदूषकों को समेटने वाला बारिश का पानी बाल झड़ने और रुखे होने का कारण बन जाता है कभी कभी, इसलिए बारिश में भीगने के बाद बाल में शैंपू करना नही भूलिए और बाल में शैंपू के बाद हो सके तो हल्का कंडीशनर जरूर लगाइए। बाल सुखाने के लिए ड्रायर का उपयोग नही कीजिएगा। बाल की जड़ें कमजोर होने के कारण बाल टूटने का खतरा ज्यादा बना रहता है।

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